शिक्षक दिवस की बारी आई तो माता सावित्री बाई फुले और लॉर्ड मैकाले की याद आई 1913
शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं ! आज जब शिक्षक दिवस की बारी आई, तो माता सावित्री बाई फुले और लॉर्ड मैकाले की याद आई।

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं ! आज जब शिक्षक दिवस की बारी आई, तो माता सावित्री बाई फुले और लॉर्ड मैकाले की याद आई।

शिक्षक दिवस सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं! आज जब शिक्षक दिवस की बारी आई, तो माता सावित्री बाई फुले लॉर्ड मैकाले की याद आई। लार्ड मैकाले ने भारतीय समाज के लिये सन् 1858 में Indian Education Act बनाया। जिसके द्वारा अंग्रेजो ने गुलाम भारत में “समान शिक्षा नीति” लागू की।

सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं! आज जब शिक्षक दिवस की बारी आई, तो माता सावित्री बाई फुले लॉर्ड मैकाले की याद आई।

शिक्षक दिवस की सबको बधाई! आज जब शिक्षक दिवस की बात आई तो मुझे गोरी चमड़ी लॉर्ड मैकाले याद आ गया।
लार्ड मैकाले ने भारतीय समाज के लिये सन् 1858 में Indian Education ACT बनाया। जिसके द्वारा अंग्रेजो ने गुलाम भारत में “समान शिक्षा नीति” लागू की। इस प्रकार दबे कुचले अछूत समाज को भी सभी के समान शिक्षा ग्रहण करने का समान अवसर प्राप्त हुआ।

मैकॉले द्वारा दो सबसे बड़े महान कार्य…!
1.भारत में नई शिक्षा प्रणाली लागू की, जिसके तहत शूद्र व अतिशूद्रों लोगों के लिये शिक्षा के द्वार खोले गये, आज जो शुद्र व अतिशूद्र(SC, ST, OBC)वर्ग तरक्की कर रहा उसका बीज मैकॉले ने ही बोया था। इसमें नीची जातिवाले भी पढ़ सकते है।

इसमें एकलव्य जैसो का अंगूठा काटने का चांस नही रहा। शिक्षक दिवस लार्ड मैकाले

इसमें एकलव्य जैसो का अंगूठा काटने का चांस नही रहा। अगर भारत में मैकॉले का शिक्षा सिस्टम ना होता तो ज्योतिबा फुले और बाबा साहेब कभी विद्वान ना बन पाते।
इसी Act. के लागू हो जाने पर #शूद्र, डॉबाबाअम्बेडकर, बाबू जगजीवनराम, उद्धम सिंह और #बाबूमंगूराममुंगोलिया जैसे दलित शिक्षा प्राप्त कर सके।

2- लॉर्ड मैकाले ने भारतीय समाज को एक समान न्याय प्रणाली में बाँधने तथा धर्म आधारित प्रणाली को समाप्त करने के लिये सन 1860 में 511 धाराओ से युक्त “#भारतीयदण्डसहिंता” का सृजन कर उसे लागू किया। ऐसा करने से मनुस्मृति निष्प्रभावी हुई और एक समान न्याय व्यवस्था लागू हुई। जिससे समाज को समान रूप से न्याय मिलना आरम्भ हुआ।
मनुविधान को हटाकर आईपीसी बनाकर सम्मान अपराध के लिये सम्मान दंड व्यवस्था (भारतीय दंड सहिंता) लागू की। भारतीय दंड सहिंता के कानून ब्राह्मण और मेहतर सबके लिये सम्मान थे।

पर दुर्भाग्य इस देश के शुद्रो का, की जिसने इनको पढ़ने नहीं दिया और इन्हें शिक्षा से हजारों सालो से दूर रखा उनके नाम डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयन्ती एवं शिक्षक दिवस शिक्षक दिवस मनाते है

सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं! आज जब शिक्षक दिवस की बारी आई, तो माता सावित्री बाई फुले लॉर्ड मैकाले की याद आई।

शिक्षक दिवस : सावित्री बाई फुले जिन्होंने दिलाया देश की हर महिला को पढ़ने का हक़महिला शिक्षा के क्षेत्र में आज भी हमारा देश काफी पिछड़ा है.देश के कई हिस्से ऐसे है जहाँ आज भी बालिकाओं को पढ़ाया लिखाया नहीं जाता.ज़रा सोचिये आज से करीब 150 साल पहले क्या हाल होगा?

सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं! आज जब शिक्षक दिवस की बारी आई, तो माता सावित्री बाई फुले लॉर्ड मैकाले की याद आई।

और कल्पना कीजिये एक महिला उस समय में लोगों को प्रेरित करे महिला शिक्षा के लिए.क्या कहेंगे उस महिला को आप ? महानायिका है ना.आज की हमारी शिक्षक दिवस विशेष में आपको बताएँगे भारत की उस महानायिका की जिसने डेढ़ सौ साल पहले समाज के भारी विरोध के बाद भी देश की महिलाओं में शिक्षा की अलख जगाई.वो महानायिका थी

भारत की प्रथम महिला शिक्षक सावित्री बाई फुले.जन्म और बचपन 3 जनवरी 1831 को जन्म हुआ था सावित्री बाई फुले का. बचपन में उन्हें स्कूल नहीं भेजा गया था क्योंकि वो वक्त ऐसा था कि लड़कियों को पढ़ाना लिखाना गलत समझा जाता था और ऐसा माना जाता था कि लड़कियों का काम शादी से पहले माता पिता के घर की सेवा करना और शादी के बाद ससुराल की देखभाल करना ही होता है.

एक बार सावित्री कोई किताब पलट रही थी ये देखकर उनके पिता बहुत क्रोधित हुए और सावित्री से किताब छीन ली.उनके पिता ने किताब ज़रूर छीन ली थी पर सावित्री के मन से पढने का ज़ज्बा वो नहीं निकाल पाए.ज्योतिबा फुले से विवाह और जिंदगी में बदलाव –कहते है न जहाँ चाह वहां राह. 9 वर्ष की आयु में सावित्री का विवाह ज्योतिबा फुले से हुआ. जो प्रसिद्ध समाजसेवक और शिक्षक थे.

जब सावित्री बाई स्वयं पढने जाती थी तो लोग उन पर भी पत्थर फेंकते थे और तरह तरह से परेशान करते थे शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं

ज्योतिबा की देखरेख में सावित्री ने पढ़ना सीखा. 1848 में सावित्री ने भारी विरोध के बाद भी देश का पहला कन्या विद्यालय खोला. उस समय उस स्कूल में मात्र 9 बालिकाओं ने दाखिला लिया था.सावित्री बाई उन बालिकाओं की मुश्किलें समझती थी क्योंकि जब सावित्री बाई स्वयं पढने जाती थी तो लोग उन पर भी पत्थर फेंकते थे और तरह तरह से परेशान करते थे.देखते ही देखते मात्र एक वर्ष में ही एक विद्यालय से बढ़कर ये संख्या पांच कन्या विद्यालय की हो गयी

.सावित्री बाई फुले देश की पहली महिला शिक्षक तो थी ही उन्हें ही देश की पहली महिला प्रधानाध्यापक होने का भी गौरव हासिल हुआ.ज़रा सोचिये उस दौर में सावित्री बाई के लिए लड़कियों की पढाई के लिए लड़ना कितना मुश्किल रहा होगा लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और भारत में महिला शिक्षा की शुरुआत करके ही मानी.सावित्रीबाई का निधन 1891 में प्लेग से हो गया.

बीमारी के समय भी सावित्री बाई फुले प्लेग रोगियों का ही इलाज़ कर रही थी.सावित्री बाई फुले ने जो किया उसके लिए भारत की हर लड़की उनकी ऋणी रहेगी. सावित्री बाई फुले सिर्फ अपने स्कूल की लड़कियों की ही शिक्षक नहीं थी वो तो भारत की हर महिला की शिक्षक थी आखिर सावित्री बाई फुले ही तो थी जिनकी वजह से आज ना सिर्फ हर महिला आसानी से पढ़ सकती है

अपितु पुरुष से कंधे से कन्धा मिलकर चल सकती है.देश की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई को हमारा नमन🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏शिक्षक दिवस पर भारत में स्त्री शिक्षा की शुरुआत करने वाली महानायिका को नमन

Kajal Manikya
Author: Kajal Manikya

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