हिन्दुस्तानी चमत्कार क्या मुर्खो की तादात सच में सबसे ज्यादा है 21वीं सदी में 80% हिन्दुस्तानी चमत्कार में विश्वास करते हैं पर आविष्कार में नहीं

क्या हिंदुस्तान में मुर्खो की तादात सच में सबसे ज्यादा है 21वीं सदी में 80% हिन्दुस्तानी चमत्कार में विश्वास करते हैं पर आविष्कार उत्पादन में नहीं

चमत्कार नहीं अविष्कार उत्पादन देखिये। क्या हिंदुस्तान में मुर्खो तादात सच में सबसे ज्यादा है21वीं सदी में 80% हिन्दुस्तानी चमत्कार में विश्वास करते हैं पर आविष्कार में नहीं

बर्फ में बैठे रहना, 400 साल जीवित रहने की कहानी,कैलेंडर के दूध पीने की कहानी, 400 साल मौन रहने, पानी पर चलने, योग से उड़ने की क्षमता आना, फूल का कबूतर बनाना, गहने दुगना करना, गायब हो जाना, मुर्दे को जिंदा करना, अमृत की खोज कर लेना, रूप बदल लेना, बीमारी भगा देना, बारिश कर देना, दर्शन देकर स्वर्ग पहुंचा देना, आशीर्वाद से बेटा पैदा करना, उंगली से लिंग बदल देना, आकाशवाणी सुनना, शाप का प्रभाव, दान का प्रभाव, भूत भविष्य सब बता देना, चेहरे के तेज से नियंत्रित करना. इन बातों को फैलाने वालों और सुनने वालों से पूछो कि उन्होने ऐसा करके क्या आविष्कार या उत्पादन किया ?

जबान पर ज्ञान का उतर आना, तीनों लोकों पर राज करना, सालों उपवास करना, आजीवन कुँवारा रहना, शाकाहार ही पवित्रता की निशानी, स्वेच्छा से शरीर त्यागना, सती हो जाना,जौहर करना, नदी, समुद्र, धरती निगल जाना, फूंक मारकर भस्म कर देना, हजारों साल पहले विमान बना देना, प्लास्टिक सर्जरी कर देना, दूसरे जन्म में बदला लेना, नंगे पैर घूमना, एक विशेष रंग के कपड़े पहनने से प्रभावित लोगों की आज भी कमी नही है।

भारतीय मीडिया भी हिन्दुस्तानी चमत्कार अन्धविश्वास को फ़ैलाने में अपना पूरा योगदान करती है, परदा डालने की काम करती है

भारतीय मीडिया भी अन्धविश्वास को फ़ैलाने में अपना पूरा योगदान करती है, भारतीय मीडिया अन्धविश्वास की बुराई पर परदा डालने की काम करती है, जब लोगो ने थाली और मोबाइल रौशनी से चिल्ला चिल्ला कर कोरोना का मजाक बना रहे थे गला फाड़ कर बोल रहे थे गोकोरोना गो, तो भारतीय मीडिया ने यह बोल कर की लोग कोरोना फाइटर / वारियर्स को सलामी दे रहे, उनकी अन्धविश्वाश ढापने का काम किया और उनकी बुराई को और बढ़ावा दिया. जबकि कोरोना फाइटर / वारियर्स को सलामी वाली बात कही दिखी ही नहीं सभी जगह पागलपंथी दिख रही थी. इन बातों को फैलाने वालों और सुनने वालों से पूछो कि उन्होने ऐसा करके क्या आविष्कार या उत्पादन किया ?

भारतीय मीडिया भी हिन्दुस्तानी चमत्कार अन्धविश्वास को फ़ैलाने में अपना पूरा योगदान करती है, परदा डालने की काम करती है

कोरोना वायरस को कोरोना देवी माँ बताकर पूजा करना और करवा कर अंधविश्वास को फ़ैलाने के काम को हवा देना, हमारे देश के तीनो लोको में प्रख्यात यशस्वी ने बोला गो कोरोना गो और पूरी मुर्खो की फौज थाली ताली पीटते हुए, और मोबाइल टॉर्च से कोरोना को रौशनी दिखा कर डराने लगे कोरोना को ताली थाली पीट पीट कर भगा देना, दिया और मोमबत्ती तथा मोबाइल टॉर्च जला कर कोरोना को go corona go भगा देना.

कोरोना वायरस को कोरोना देवी माँ बताकर पूजा करना और करवाना, यह बात साबित करती है कि हिंदुस्तान में 80% मुर्ख लोग भदे पड़े है, जिनको को चतुर लोग अन्धविश्वास की खाई में धकेल देते है, इन बातों को फैलाने वालों और सुनने वालों से पूछो कि उन्होने ऐसा करके क्या आविष्कार या उत्पादन किया ?

mobile torch क्या हिंदुस्तान में मुर्खो की तादात सच में सबसे ज्यादा है 21वीं सदी में 80% हिन्दुस्तानी चमत्कार में विश्वास करते हैं पर आविष्कार उत्पादन में नहीं

ऐसी अंधविश्वास को फैलाने वालों और सुनने वालों से पूछो कि उन्होने ऐसा करके क्या आविष्कार या उत्पादन किया ?
क्या खोज की ?
किसका शोषण कम किया ?
कितना विदेशी आक्रमणकारियों को भगाया ?
कितनी गरीबी दूर की ?
कितना अपराध कम किया ?

ऐसी अंधविश्वास कहानियां एकाधिकारवादी,जातिवादी,भाग्यवादी और लिंगभेदवादी लोग, मानसिक रोगी लोगो की बुद्धि को भ्रमित करने के लिए और आपको प्रतियोगिता से बाहर करने के लिए फैलाते हैं, ताकि आप बदलाव की न सोचें।, चमत्कारप्रियता छोड़िये। प्रश्न करिये , तर्क करिये ।वैज्ञानिक पैदा करिये। उत्पादन करिये । समय, ऊर्जा और संसाधन को ऐसे कार्यों मे लगाये जो उत्पादक हों, कल्याणकारी हों, विश्व स्तर पर स्वीकार्य हों । हंसी का पात्र मत बनिये।

image क्या हिंदुस्तान में मुर्खो की तादात सच में सबसे ज्यादा है 21वीं सदी में 80% हिन्दुस्तानी चमत्कार में विश्वास करते हैं पर आविष्कार उत्पादन में नहीं

आपकी कहानियों को कोई विदेशी इतिहासकार, नेता या वैज्ञानिक नही मानने वाला। इससे ऐसा नही कि कमजोरों का ही नुकसान है इन्हे फैलाने वाले भी कभी ताकतवर नही हुए । वे कभी कोई युद्ध नही जीत पाये, उनकी बहादुरी और ज्ञान यही था अपनी महिलाओ को पीट लो, और अपने से कमजोर को पीट लो। एक विदेशी सिर्फ 18 घुड़सवार लेकर आया, और सारे राजाओं को हिन्दू पर्वत से बंगाल तक रौंदता चला गया। अपने देशवासियों और अपनी महिलाओ को कमजोर करने वाला समाज कैसे मजबूत सैनिक, ज्ञानी और वैज्ञानिक पैदा कर सकता है।

उपरोक्त अधविश्वास बातों को फैलाने वालों और सुनने वालों से पूछो कि उन्होने ऐसा करके क्या आविष्कार या उत्पादन किया ?

उपरोक्त अधविश्वास को फैलनेवाले जो चाँद चतुर वर्ग है, उनसे पूछो कि कौन गोल्ड मैडल और नावेल प्राइस हासिल कर लिया है, या देश, राष्ट्र, मनुस्य जाति के हित में कौन बड़ा योगदान दिया है


डाॅ डी एस अशोक

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