पद्मश्री पुरस्कार सवाल न कर सकते हों चयन पर सोच तो सकते 1
पद्मश्री पुरस्कार आप सवाल भले ही न कर सकते हों मगर इसकी चयन प्रक्रिया पर सोच तो जरूर सकते होंगे

पद्मश्री पुरस्कार आप सवाल भले ही न कर सकते हों मगर इसकी चयन प्रक्रिया पर सोच तो जरूर सकते होंगे

पद्मश्री पुरस्कार आप सवाल भले ही न कर सकते हों मगर इसकी चयन प्रक्रिया पर सोच तो जरूर सकते होंगे

पद्मश्री पुरस्कार बॉलीवुड से सोनू सूद, प्रकाश राज, अरिजीत जैसों को छोड़कर कंगना, करण जौहर, एकता कपूर, अदनान सामी इत्यादि को पद्म पुरस्कार मिलना या फिर खेल जगत में पीवी संधू को मिला और हिमदास, दीपिका कुमारी, कोमोलीका इत्यादि छूट जाती है तो आप सवाल भले ही न कर सकते हों मगर इसकी चयन प्रक्रिया पर सोच तो जरूर सकते होंगे? कुल 119 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। दो-चार डिजरविंग भी लगे हालांकि यह भी केवल देखकर ही लगा।

पद्मश्री पुरस्कार देश में असंख्य लोग रेहड़ी चलाते हैं, असंख्य लोग चुने, भट्टे पर जिंदगी खपा चुके हैं, असंख्य लोग खेतों में मर गये, असंख्य लोग रिक्शा चलाकर खप गये पर सच यह है कि इस देश में असंख्य लोग अभी गरीब भी नहीं कहलाते हैं। गरीब की भी यहां एक क्लास होती है। एकता कपूर का योगदान यह है उसने असंख्य परिवार बर्बाद किये। भारत में आज हर तीसरी महिला डिप्रेशन का शिकार है जिसमें सबसे बड़ी भूमिका हिंदी धारावाहिकों की है और इनका निर्माण करने वाली एकता कपूर है।

पद्मश्री पुरस्कार एकता कपूर साइंस फिक्शन धारावाहिक बनाने की बजाय इन्होंने झगड़े, अंधविश्वास, पाखण्ड और नफ़रत को तवज्जो दी है

Padma Shri: Four from Odisha get Padma Shri | Bhubaneswar News - Times of  India
पद्मश्री पुरस्कार

साइंस फिक्शन धारावाहिक बनाने की बजाय इन्होंने झगड़े, अंधविश्वास, पाखण्ड और नफ़रत को तवज्जो दी है।करण जौहर पर कहना ही क्या? एकता कपूर जो धारावाहिक में करती है करण जोहर वह फिल्मों में करते हैं। अब बची कंगना इनपर बहुत कुछ कह चुका हूँ बाक़ी आप खुद भी जानते हैं। बस यह समझ लीजिए अगली बार अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, रुबिका लियाकत, अंजना ओम कश्यप इत्यादि से लेकर फेहरिस्त बहुत लंबी बाक़ी है। पद्मश्री पुरस्कार

इंतजार कीजिए पद्मश्री पुरस्कार।आपको याद होगा पिछली बार अरुण जेटली जी ने एक डिजरविंग व्यक्ति का नाम कटवाकर इंडिया टीवी के रजत शर्मा को पद्म पुरस्कार दिलाया था? इसकी चर्चाएं सरेआम हुई और अंत में समाचार समाप्त। इन प्रक्रियाओं को निष्पक्ष मत कहिये लेकिन यह भी सत्य है कि यह प्रक्रिया आज से नहीं बल्कि आजादी के समय से ही चली आ रही है।

पद्मश्री पुरस्कार अंत में यही कहूंगा कि जिन्हें नहीं मिला उनका दुःख भी बड़ा है और हर व्यक्ति को सम्मान भी असम्भव है। दशकों से मिलता भी आ रहा,अनदेखी भी होती आ रही है और एकाध महान विभूतियां भी रही है। मगर सवाल हमेशा से यही है कि गलत व्यक्ति को किसी भी दौर में सम्मान मिले तो यह अच्छे और ईमानदार व्यक्तियों का अपमान होता है।

Mahender Kumar
Author: Mahender Kumar

Journalist

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