एक सीट न जीतनेवाली रानिल विक्रमसिंघे की बनी सरकार श्रीलंका 2
प्रधानमंत्री देश छोड़ कर भागे, एक भी सीट न जीतनेवाली पार्टी रानिल विक्रमसिंघे की बनी सरकार श्रीलंका

प्रधानमंत्री देश छोड़ कर भागे, एक भी सीट न जीतनेवाली पार्टी रानिल विक्रमसिंघे की बनी सरकार श्रीलंका

fl41t8r8 ranil प्रधानमंत्री देश छोड़ कर भागे, एक भी सीट न जीतनेवाली पार्टी रानिल विक्रमसिंघे की बनी सरकार श्रीलंका

बौद्ध धर्म बहुसंख्यकवादी राजनीती के प्रधानमंत्री परिवार सहित देश छोड़ कर, एक भी सीट न जीतनेवाली पार्टी रानिल विक्रमसिंघे की बनी सरकार श्रीलंका जब तक श्रीलंका की बौद्ध बहुसंख्यक जनता धर्म और जाति की रजनीतिक अफीम के नशे से बहार आती तबतक श्री लंका पूरी तरह बरबाद हो चुका था,

बहुसंख्यक वाद के ऊपर राजनीति करने वाले पूर्ण बहुमत से जीतने वाली श्रीलंकाई  पूर्व प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे को परिवार सहित  देश छोड़कर भागना पड़ा और एक भी सीट ना जीत पाने वाली पुरानी पार्टी यूएनपी  के नेता को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री बनाया गया

आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे जो पूर्ण बहुमत से बहुमत से पार होकर प्रधानमंत्री बने थे श्रीलंका में सिंहली जाति सिंहला भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 74% है और तमिल और अन्य भाषा बोलने वाले लोग अल्पसंख्यक माइनॉरिटी श्रेणी में आते हैं और सिंगला भाषा बोलने वाले 74% लोग बहुसंख्यक माने जाते हैं

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महिंदा राजपक्षे के भक्तो तबियत से ढूढ़ ढूढ़ कर हो रही है धुलाई

 जो ज्यादातर बौद्ध धर्म को मानने वाले  हैं और महिंद्रा राजपक्षे बहुसंख्यक वादी राजनीति करते थे उन्होंने धीरे-धीरे अल्पसंख्यकों का हितों का अधिकारों का हनन करने लगे और बहुसंख्यक वादी सिंगला भाषी लोगों का संतुष्टि करण करने लगे  और बौद्ध धर्म का  महिमामंडन चारों तरफ होने लगा और अन्य धर्मों पर उनकी संस्थानों पर अटैक होने लगे  

यह सब देख कर सिंगला भाषा बोलने वाले 74% लोग बहुत खुश थे और उन्होंने महिंद्रा राजपक्षे का पूरा समर्थन किया जिस कारण वह बहुमत से ज्यादा सीटें हासिल किए और विकास और उन्नति की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों का बहुत बुरा स्थिति रहा 1 सीट भी जीतना मुश्किल था जबकि चार बार प्रधानमंत्री रहे रानी विक्रम सिंह भी अपनी सीट से हार गए जहां उनका गढ़ माना जाता था 

प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने श्रीलंका बर्बादी का बुनियाद रखा था अब रानिल विक्रमसिंघे संभालेंगे

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श्रीलंका  मे जो  आज आर्थिक तंगी महंगाई और अर्थव्यवस्था का ध्वस्त होना और अकाल जो पढ़ा हुआ है इसकी बुनियाद महिंद्रा राजपक्षे ने बहुत पहले बहुसंख्यक वादी श्रीलंकन को खुश करने के  चक्कर में रख चुके थे जिसका असर आज श्रीलंका की जनता भुगत रही है इसी प्रकार की राजनीति भारत देश में भी किया जा रहा है 

श्रीलंका की पूर्व  प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने आर्थिक व्यवस्था को सुधारने और महंगाई दूर करने के लिए वहां की सरकारी संस्थानों रेलवे बस अड्डों रेलवे स्टेशनों हिस्टोरिकल भवन आर्थिक बिल्डिंग इन तमाम सरकारी विभागों को संस्थानों को हवाई जहाज आदि को बेच दिया ताकि महंगाई से उभर सके लेकिन महंगाई से उभर नहीं पाए उल्टा ही देश छोड़कर परिवार सहित भाग गए

 श्रीलंका में अकाल और महंगाई से मरती जनता ने बरसों पुरानी बहुसंख्यक वादी राजनीति करने वाली महिंद्रा राजपक्षे कि सरकार को उखाड़ फेंका और जैसे कि आप जानते हैं कि वहां पर खाने के लिए कोई भी सामग्री पीने के लिए दूध भी नहीं है जनता की बुनियादी भोजन वस्तुएं देने में वहां की सरकार असमर्थ रही है 

श्रीलंका को बर्बाद करने वाले कुछ लोग जिस कारण से वहां की जनता रोड पर आ गई प्रधानमंत्री को अपना परिवार सहित श्रीलंका से भागना पड़ा

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जिस कारण से वहां की जनता रोड पर आ गई प्रधानमंत्री को अपना परिवार सहित श्रीलंका से भागना पड़ा कुछ मंत्री लोगों की जनता ने पीट-पीटकर हत्या कर दिया और प्रधानमंत्री भवन में आग लगा दी प्रधानमंत्री के घर में आग लगा दिए 

इस बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति ने स्थिति को संभालने के लिए श्रीलंका की बहुत पुरानी राजनीतिक पार्टी जिसको 2020 में मात्र 1 सीट हासिल हुए थे उस पार्टी के नेता और  रानिल विक्रमसिंघे को इस आपात काल में प्रधानमंत्री बनाया है यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता रानिल विक्रमसिंघे को मात्र एक सीट पर ही जीत हासिल हुई थी और वह खुद भी अपना संसदीय सीट से हार गए थे लेकिन उनकी पार्टी को 1 सीट हासिल हुआ था श्रीलंका की 225 सदस्य संसद में उन को शपथ दिलाई गया 

गौरतलब है कि रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के चार बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं लेकिन राष्ट्रपति श्री सेना ने उनको 2018 में प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था और 2 महीने बाद पुनः उनके प्रधानमंत्री पद पर फिर से बहाल कर दिया था रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका के सभी राजनीतिक पार्टियों का दलों का समर्थन प्राप्त है और उनको 6 महीने के लिए प्रधानमंत्री बनाया गया है 

रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि मेरे सामने चैलेंज है और मैं इस संकट के घड़ी से श्रीलंका को को  निकालने के लिए पूरा प्रयत्न करूंगा और इसमें जरूर कामयाब होगा यूनाइटेड नेशनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब यह वार देना यह विश्वास दिलाया कि हम 6 महीने में पूर्ण बहुमत हासिल कर लेंगे हमें इस बात का पूरा विश्वास है आपको यह जानकारी होना चाहिए की यूनाइटेड नेशनल पार्टी से अलग होकर के प्रेमदासा ने एक अलग पार्टी राजनीतिक पार्टी बना ली थी जिसका नाम एसजेबी है और वह प्रमुख विपक्षी दल है 

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोट बाया राजपक्षे टीवी चैनल के माध्यम से अपने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया और 1 सप्ताह में एक युवा मंत्रिमंडल का गठन करने का वादा किया रानिल विक्रमसिंघे को एक सफल राजनीतिक नेता माना जाता है और यह भी माना जाता है कि उनका नेतृत्व में वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं और स्थिति को बहाल करने का उनको खास अनुभव भी है 

इसी बीच आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका में 17 मई को राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया जाएगा 

सदन के अध्यक्ष महिंद्रा यापा अभय वर्द्धिनेनी बताया की संसद को विशेष रुप से अनुमति मिलने पर शुरू किया जाएगा और तमाम संकटों से  उभरने के लिए सदन में विशेष चर्चा की जाएगी और सांसदों की सुरक्षा हितों को लेकर भी चर्चा किया जाएगा और राष्ट्रपति का विश्वास अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी और नए राष्ट्रपति का गठन होने पर भी चर्चा किया जाएगा ताकि देश को एक स्थाई सरकार मिल सके और आर्थिक तंगी और महंगाई से देश की जनता को राहत दी जा सके

Mahender Kumar
Author: Mahender Kumar

Journalist

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