क्या इतिहास में धम्मलिपि नाम की कोई लिपि रही है
क्या इतिहास में धम्मलिपि नाम की कोई लिपि रही है

क्या इतिहास में धम्मलिपि नाम की कोई लिपि रही है

क्या इतिहास में धम्मलिपि नाम की कोई लिपि रही है?
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आजकल कुछ लोग कहते हैं, अशोक के ब्राह्मी लिपि का नाम धमंलिपि है जबकि अशोक ने ब्राह्मी लिपि में लिखे बातों को धम्मलिपि कहा ही है साथ में शाहबाजगड़ी और मानसेहरा(पाकिस्तान) के खरोष्ठी लिपि में भी लिखे अपने लेखों को धमंलिपि कहा है,फिर तो ये माना जाय कि खरोष्ठी लिपि का नाम भी धमंलिपि है? कुल चार लिपियों में अशोक के लेख हैं और चारों में धमंलिपि लिखा मिलता है। ये चार लिपियाँ हैं:- ब्राह्मी, खरोष्ठी, यूनानी और आरमेइक।

मतलब साफ है कि यहाँ लिपि का अर्थ हुआ:-लिखा हुआ
यानी कि जो कुछ लिखित हो आप उसे लिपि कह सकते थे(ठीक यही बात पाणिनि के अष्टध्यायी में है)। बाकी अशोक अपने अभिलेखों में हर चीज को धमं(संस्कृत या हिंदी में धर्म) से जोड़कर लिखता है। जैसे:-धमंदान,धमंयुक्त,धमंमहामात,धमंनुशासन,धमंभेरी,धमंवृद्धि,धमंनिश्रित,धमंधिष्ठित,धमंपेखा आदि-आदि।

ब्राह्मी को तो छोड़िए वह खरोष्ठी लिपि में भी लिखता है कि:- 1.यह धमंलिपि देवों के प्रियदर्शी राजा द्वारा लिखवाई गयी(शाहबाजगड़ी का खरोष्ठी लिपि, पहला शिलालेख)।
2. यह धमंलिपि लिखवाई गयी कि यह चिरस्थायी रहे और मेरी प्रजा इसका अनुसरण करे(मानसेरा का खरोष्ठी लिपि, पाँचवा शिलालेख)।

बाकी इतिहासकारों ने इन लिपियों का नामकरण ललितविस्तर(पहली सदी,इसमें 64 लिपियों का उल्लेख मिलता है) जैसे बौद्ध ग्रन्थ और चीनी विश्वकोष फा-वान-सु-लिन के आधार पर तय किया है क्योंकि अभिलेखों में लिपियों के नाम पहली सदी के आसपास तक नहीं मिलते हैं।
प्राचीन जैन ग्रन्थ भगवतीसुत्त, संवायांगसुत्त और पन्नवणासुत्त में भी बंभी(ब्राह्मी) और खरोत्थि(खरोष्ठी) का स्पष्ट नाम मिलता है।
एक जैन कथा में बंभी का नामकरण पहले तीर्थंकर आदिनाथ के बेटी के नाम पर है। ह्वेनसांग ने भी इसे ब्राह्मी लिपि कहा है।

निष्कर्ष:-धम्मलिपि का मतलब है कि जहाँ पर धमं(धर्म) से संबंधित बातें लिखी गयीं हो, ये किसी भी लिपि में हो सकता है,इसका एक संस्करण यूनानी लिपि में भी है(अशोक का ही)। अगर आप देवनागरी में धम्म की बातें लिखेंगे तो उसे भी धम्मलिपि कहा जायेगा(अगर इसे अशोक के समय के अर्थों में देखें तब)।

सवाल अब ये है कि अशोक के धमं का मतलब क्या है? इसके लिए पढ़ें अशोक का द्वितीय_स्तम्भलेख, उसने विस्तार से बताया है।

अशोक के लेख मुख्यतः धमं(धर्म) के लिए ही हैं बाकी उसमें सामाजिक और आर्थिक वर्णन केवल प्रसंगवश मिलता है इसलिए अशोक के लेख इन पर पूरा विवरण नहीं देते और हमें मजबूरी में साहित्यिक रचनाओं से जानकारी जुटानी पड़ती है।

धमं क्या है? इसका हिंदी अनुवाद अशोक के द्वितीय स्तंभलेख से👇

SideNote:-
यहाँ धम्म/धर्म का मतलब किसी सम्प्रदाय से नहीं बल्कि आचरण से है।
धम्म या धर्म का अभिप्राय ऐसे समझिये।
कुशल धम्म:- अच्छा आचरण
अकुशल धम्म:- बुरा आचरण

अंकित जायसवाल
© Ankit Jaiswal

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Mahender Kumar
Author: Mahender Kumar

Journalist

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