नेताजी डाकू छविरामसिंह यादव वास्तविक रॉबिनहुड जिनको मुलायमजी का नेताजी टाइटल से जलन है वो अवश्य पढ़ें 1982
डाकू छविरामसिंह यादव वास्तविक रॉबिनहुड जिनको मुलायमजी का ” नेताजी ” टाइटल से जलन है वो अवश्य पढ़ें

डाकू छविरामसिंह यादव वास्तविक रॉबिनहुड जिनको मुलायमजी का ” नेताजी ” टाइटल से जलन है वो अवश्य पढ़ें

डाकू छविरामसिंह नेताजी, मुलायम जी

डाकू छविरामसिंह यादव वास्तविक रॉबिनहुड जिनको मुलायमजी का ” नेताजी ” टाइटल से जलन है वो अवश्य पढ़ें :मैनपुरी जिल्ले में जन्में डाकू छविरामसिंह यादव जैसा आजतक कोई डाकू नही हुवा जिसको जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिये 1 लाख का इनाम रखा था जो आजतक किसी डाकू पर नही रखा.

डॉन को पकड़ने के लिये 11 मुल्कों की पुलिस खोज रही वाला डायलॉग फिल्मों में सुना होगा डाकू छविराम पर असल मे 3 राज्यो ( मुल्क ) की पुलिस को एकाउंटर करने का आदेश नोटिस स्व इंदिरा गांधी ने दे रखा था डाकू छवीराम जैसा नीति धर्म मर्यादावाला कोई डाकू नही हुवा वो अमीरों को लूट गरीबो में बाट दिया करता था शादी वाला घर नही लुटता था.

रखैल ने दूध में नशा मिलाया तो राष्ट्रपति मेडल मिला कप्तान को

रखैल ने दूध में नशा मिलाया तो राष्ट्रपति मेडल मिला कप्तान को छविराम का बड़ा खौफ था. पुलिस पकड़े तो कैसे. पहचानती ही नहीं थी. फिर उसने कुरावली के पास पड़रिया चौराहे पर बड़ा भारी जग्ग (यज्ञ) किया. 8 दिन चला. छविराम वहां था. हजारों लोगों के बीच. पुलिस पकड़ नहीं पाई. आगरा तक से पत्रकार देखने कवर करने आए थे. फिर आया साल 1980. वीपी सिंह सीएम बने.

उन्होंने कहा कि दस्यु तो खत्म कर के रहेंगे. पुलिस को खुली छूट दी गई. यहां कप्तान थे विक्रम सिंह साहब. बाद में डीजीपी हो रिटायर हुए. उन्होंने एक आदमी को फोड़ा. मथुरा सिंह नाम के. सजातीय, मगर छविराम के गैंग में. मथुरा सिंह की एक रखैल थी. वो छविराम के भी साथ थी.

उसने दूध में कुछ ऐसा नशीला पदार्थ मिला दिया कि पूरा गैंग बेसुध. गैंग उस वक्त जैथरा थाना के सरौट इलाके में था. पिंजरी नाम की जगह पर. मगर पुलिस ऐसे कैसे भरोसा कर ले. तो एक आदमी मौके पर भेजा गया. जब उसने देख लिया कि कोई फायर ठोंकने की हालत में नहीं है, तो पुलिस को खबर की. फिर सब पकड़ लिए गए. खरउआ नाला के पास की बात है. फिर छविराम का एनकाउंटर कर दिया गया.

पुलिसवालों को मारकर हथियारों लूट लेता था करीब 200 पुलिसवालों को मारा था पुलिस में इतना ख़ौफ़ था कि कोई पोस्टिंग लेने तैयार नही था

बीहड़ो से निकली बारात को ख़ुद साथियों को आदेश देकर सकुशल बाहर पहुँचा देता था जो गांव शहर को लूटना होता था वहाँ वहाँ पहले से संदेश पहुँचा देता था पुलिसवालों को मारकर हथियारों लूट लेता था करीब 200 पुलिसवालों को मारा था पुलिस में इतना ख़ौफ़ था कि कोई पोस्टिंग लेने तैयार नही था एकबार CM वी पी सिंह के कहने पर पुलिस ने बड़ी टीम बनाकर शक के आधार पर (यहीं छविराम आया रहता है ).

एक यादव बाहुल्य गांव में आग लगा दी छविराम को पता चलने पर थाने में घुस सभी पुलिसकर्मियों को मार थाना जला दिया अंत मे मुख्यमंत्री वी पी सिंह ने कांग्रेस के लोकल नेताखुशीराम यादव और जदुवीरसिंह यादव को जिम्मेदारी दी छविराम को आत्मसमर्पण कराने के ऑर् पुलिस ने भी बाहेधरी दी हम भी पिछला सबकुछ भूलने को तैयार है .

अंत मे बीहड़ो के साथ साथ डाकू छवीराम यादव भी शांत हो गयेओर इस तरह धोखे से मर्द डाकू का अंत हुवा डाकू छविराम यादव को लोग प्यार से #नेताजी कहते थे

कुछ महिनों बाद छवीराम को आत्मसमर्पण कराने को सफल भी रहे लेकिन दगा धोखा हुवा8 -10 साथियों के साथ आये डाकू छविराम को 2000 हज़ार की पुलिस फ़ौज ने घेर लिया ( 2 हज़ार की फौज रजवाड़े में हुवा करती थी ) भनक लगते आमना सामना हुवा फ़िर भी 9 घंटो फायरिंग चली पूरा इलाका गूंजता रहा घँटो तक तो किसी पुलिस की पास जाने की हिम्मत नही हुई.

अंत मे बीहड़ो के साथ साथ डाकू छवीराम यादव भी शांत हो गयेओर इस तरह धोखे से मर्द डाकू का अंत हुवा डाकू छविराम यादव को लोग प्यार से #नेताजी कहते थे बाद में मुलायमसिंह को लोगो ने #नेताजी कहना शुरू किया- Ramesh Singh Yadav जी की वाल से –

Mahender Kumar
Author: Mahender Kumar

Journalist

Leave a Reply