FTII पुणे में 'रिमेंबर बाबरी' पर हंगामा और मारपीट, पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया

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FTII Pune- India TV Hindi

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एफटीआईआई पुणे में हंगामा और मारपीट

पुणे: फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII ) पुणे के कैंपम में आज जमकर हंगामा हुआ। यह हंगामा रिमेंबर बाबरी और Death of Constitution के बैनर को फाड़ने के दौरान हुआ। दरअसल, FTII पुणे कैंपस में रिमेंबर बाबरी और Death of Constitution लगाए गए थे। इसकी सूचना मिलने पर आज दोपहर हिंदुत्ववादी संगठन के कार्यकर्ता जबरन FTII कैंपस में घुसे और विवादित पोस्टर को फाड़ने लगे। इस दौरान कैंपस में मौजूद FTII के छात्रों के साथ उनकी झड़प हुई, दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई। मारपीट में दोनों पक्ष के लोग मामूली रूप से जख्मी हो गए। फिलहाल पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया है। घायलों को मेडिकल के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि FTII के सुरक्षा विभाग से शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल कैंपस में माहौल शांत है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में ‘बाबरी’ पर नारेबाजी

उधर, राजधानी दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर के अंदर कुछ छात्रों द्वारा प्रदर्शन करने की कोशिश का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शन परिसर के अंदर हुआ था और कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिलने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि तख्तियां लेकर युवाओं का एक समूह परिसर के अंदर इकट्ठा हुआ और ‘‘स्ट्राइक फॉर बाबरी’’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन अयोध्या में राम मंदिर में राम लला की नयी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के दिन किया गया था। 

वीडियो में परिसर के सुरक्षा कर्मियों को प्रदर्शनकारियों को हटाते हुए देखा जा सकता है और दो युवकों को तख्तियां ले जाते हुए देखा जा सकता है। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि कल परिसर के अंदर लुबाबीब बशीर के नेतृत्व में ‘फ्रेटरनिटी मूवमेंट’ नामक एक संगठन के विरोध प्रदर्शन के बारे में सूचना मिली थी लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली। अधिकारी ने कहा कि ‘‘एहतियाती कदम’’ के तहत सुरक्षाकर्मियों को परिसर के बाहर तैनात किया गया है। ‘फ्रेटरनिटी मूवमेंट’ परिसर में एक छात्र संगठन है। 

राम मंदिर उस स्थान पर बनाया गया है जहां 1992 में कार सेवकों द्वारा ध्वस्त किए जाने से पहले 16वीं शताब्दी की बाबरी मस्जिद थी। सोमवार को वीडियो सामने आने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने कहा कि ‘‘प्रदर्शन’’ के कारण शैक्षणिक गतिविधि बाधित नहीं हुई और स्थिति नियंत्रण में है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया, ‘‘सिर्फ दो से तीन छात्र थे, जो नारेबाजी कर रहे थे। कक्षाएं और परीक्षाएं बिना किसी व्यवधान के जारी रहीं।’ (इनपुट-भाषा)

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