*एक बार विचार-विमर्श जरूर करें।

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Mandir ka chor kaun

*एक बार विचार-विमर्श जरूर करें।

थानेदार :- क्या बात है ?पुजारी :- चोरी हो गई।थानेदार :- आपके घर ?पुजारी :- नहीं।थानेदार :- आपके पड़ोसियों के घर में ? पुजारी :- नहीं।थानेदार :- आपके रिश्तेदार के घर ?पुजारी :- नहीं।थानेदार :- तो फिर गांव में मुहल्ले में ?पुजारी :- नहीं।थानेदार गुस्से में :- तो फिर बताता क्यों नहीं चोरी कहाँ हुई है ? पुजारी :- मन्दिर में।थानेदार :- मन्दिर किसका है ? पुजारी :- भगवान का।थानेदार :- कौन से भगवान का ? पुजारी :- भगवान विष्णु,भगवान शिव,भगवान कृष्ण,लक्ष्मी देवी,पार्वती देवी और राधा देवी काथानेदार :- तो वो उनका घर हुआ।पुजारी :- हाँ जी।थानेदार :- ओह ! तो वहाँ तीन फैमिली रहती है।पुजारी :- वे फैमिली नहीं भगवान और देवीयां हैं। थानेदार :- घर उनका हुआ तो फिर तुम क्यों आए रपट लिखाने ? उनको आना चाहिए।साईन भी उन्हीं के चाहिए।पुजारी :- वो नहीं आ सकते !थानेदार :- गाड़ी में बैठ वहीं चलते हैं।मुआयना भी कर लेगें और साईन भी करा लेगें क्योंकि कानूनन बिना साईन के रपट नहीं लिख सकते !मन्दिर पहुँच कर … थानेदार मूर्तियों कि तरफ मुखातिब होकर पूछा :- बताओ घर के मालिको ! कहाँ,कैसे और क्या क्या चोरी हुआ ? पुजारी :- साहब ये नहीं बता सकते !थानेदार :- क्यों ये गूंगे बहरे हैं जो सुन बोल नहीं सकते !पुजारी :- साहब ये पत्थर की मूर्तियां हैं सुन बोल नहीं सकती !

थानेदार :- घर के मालिक सुन बोल नहीं सकते फिर कैसे कहाँ से कितना क्या चोरी हुआ ?

पुजारी :- साहब इस गुल्लक (दानपेटी) को तोड़ कर चोरी हुई है।रोजाना 15 से 20 हजार पब्लिक (भक्त) इस गुल्लक में डालती है।महीने के आखिरी दिन में इसे खोलता हूँ 5-6 लाख मिलते हैं।आज महीने का आखिरी दिन है वे पैसे मेरे होते हैं। थानेदार :- तुम्हारे बयान के मुताबिक घर तुम्हारा नहीं,धन तुम्हारा नहीं और धन लेते तुम हो।तुम धन लेकर अब तक चोरी ही कर रहे थे।वो धन किसी और ने ले लिया तो क्या हुआ ?पुजारी :- नहीं साहब मैं चोर नहीं,वो धन मेरा ही था।थानेदार :- इसका मतलब ये धार्मिक स्थल या श्रद्धा स्थल नहीं।लोगों को बेवकूफ बना कर धन्धा स्थल बना रखा है। पुजारी नजरें झुका कर नीचे देखने लगा।🤦🤔आप ने इसे पढ़ने के लिए समय दिया।उसका बहुत बहुत धन्यवाद।अब एक एहसान और कर दो।इस संदेश को अन्य 10-20 साथियों में और भेज दो। बस यही तरीका है।

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