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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का शिवाजी पार्क ‘जेल भरो’ आंदोलन:

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का शिवाजी पार्क ‘जेल भरो’ आंदोलन: जब मुंबई में गूंजी Gen-Z की अनूठी आवाज मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क ग्राउंड में हजारों की संख्या में युवा और समर्थक हाथों में तख्तियां और बैनर लिए नजर आ रहे हैं। तख्तियों पर चुनावी पारदर्शिता और व्यवस्था पर तीखे व्यंग्य लिखे हैं। बीच में CJP का लोगो और ‘#MainBhiCockroach’ के नारे के साथ युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जबकि सुरक्षा के मद्देनजर आसपास भारी पुलिस बल तैनात है।

जन-आंदोलन का नया अंदाज या व्यवस्था पर करारा तंज?भारतीय राजनीतिक और सामाजिक पटल पर इन दिनों एक ऐसा नाम चर्चा में है जिसने स्थापित राजनीतिक दलों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है—’कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)। हाल ही में 2 अक्टूबर को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में CJP द्वारा आहूत ‘जेल भरो आंदोलन’ (Jail Bharo Andolan) ने देश की राजनीति का पारा चढ़ा दिया। पुलिस की औपचारिक अनुमति न मिलने और तमाम पाबंदियों के बावजूद हजारों की संख्या में Gen-Z युवा और नागरिक इस प्रदर्शन में शामिल हुए।शिवाजी पार्क प्रदर्शन के मुख्य आकर्षण और घटनाक्रम: * मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग: सीजेपी के इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों के आरोपों के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा मांगना था।

* पुलिस की कार्रवाई और FIR: बिना अनुमति के शिवाजी पार्क में जुटने और नारेबाजी करने के आरोप में पुलिस ने संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य प्रमुख कार्यकर्ताओं सहित सैकड़ों अज्ञात लोगों पर मामले दर्ज किए। * दिग्गजों और कलाकारों का समर्थन: इस आंदोलन को सिर्फ छात्रों तक सीमित न रखते हुए कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और फिल्म जगत की हस्तियों का भी वैचारिक समर्थन मिला। * मीम से लेकर मुख्यधारा की बहस तक: सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक आंदोलन अब सड़कों पर एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।

क्यों अलग है CJP का यह सफर?’कॉकरोच जनता पार्टी’ का नाम भले ही एक गहरे व्यंग्य से निकला हो, लेकिन इसके जरिए उठाए जाने वाले मुद्दे—जैसे बेरोजगारी, प्रशासनिक पारदर्शिता, और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही—बेहद गंभीर हैं। संस्थापकों का मानना है कि जब-जब सिस्टम युवाओं के अधिकारों को नजरअंदाज करेगा, तब-तब इस प्रकार के डिजिटल और मैदानी प्रतिरोध देखने को मिलेंगे। शिवाजी पार्क का यह ‘जेल भरो’ आंदोलन इस बात का स्पष्ट संदेश है कि देश का युवा अब खामोश रहने के बजाय मुखर होकर अपनी बात मनवाना जानता है।

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